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शिक्षा से महरूम बच्चों का सपना पूरा करेगी वारित्रा फाउडेशन

शिक्षा से महरूम बच्चों का सपना पूरा करेगी वारित्रा फाउडेशन
गढ़ीखजूर, सदरपुर में कलरफुल स्कूल से काम शुरू, लर्निंग प्रोसेस 6 स्कूलों में पहले फेज में संस्था ने घरौंडा के 15 स्कूल किए चिन्हित
शैलेन्द्र जैन
करनाल, 20 जुलाई
ग्रामीण अंचल के सरकारी स्कूल में पढऩे वाले बच्चे अधिकतर पब्लिक स्कूल में मिलने वाली 5 सितारा सुविधाओं से वंचित रह जाते है। इन बच्चों के 5 सितारा स्कूलों में पढऩे का सपना वारित्रा फाउडेशन पूरा करेगी। जो मां-बाप आर्थिक अभाव के कारण अपने बच्चों की कल्पना को सतरंगी रंग नहीं दे पाते। उनके सपने को यह फाउडेशन पूरा कर रही है। पहले चरण में संस्था ने 15 स्कूलों को अत्याधुनिक शिक्षण सुविधाएं देने के लिए चिन्हित किया है। इसके अलावा जागृति और शिक्षा के प्रति अरूचि भी कारणों में से एक हैं। इस कड़ी में पिछड़े हुए गांव के बच्चों को सब कुछ नया कलरफुल यानी रंगीन स्वप्र सा लगे, स्कूल की कलर दीवारों पर मैथ के फार्मूलों से लेकर सब्जियों, फलों के नाम भी अंग्रेजी हिंदी दोनो में हों। स्वतंत्रता सेनानियों के कैलेंडर भी वहां दिखाई दें, ऐसा लगे कि वे प्राइवेट सुंदर स्कूल का हिस्सा हैं जहां सब कुछ बदला बदला सा है ऐसी पहल वारित्रा फाउंडेशन ने यमुना के अंतिम तट पर स्थित घरौंडा के गढ़ी ाजूर स्कूल से कर दी है। संस्था बच्चों को स्कूल टाइम के बाद पढ़ाने का क्रम जारी रखे हुए है। वारित्रा जिसका शाब्दिक अर्थ छाता है जो बारिश या गर्मी से इंसान की रक्षा करता है, ने गढ़ी खजूर स्कूल को इतना कलरफुल कर दिया है कि गांव के बच्चों को तो छोडि़ए अभिभावकों, पंचों, सरपंचों, महिलाओं को भी यकीं नही हो रहा कि ये वही स्कूल है जहां कभी वे पढ़ा करते थे। गढ़ी खजूर स्कूल के प्रिंसिपल रमनीत शर्मा भी बच्चों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। यही स्थिति कमोबेश सदरपुर स्कूल की भी है, गढ़ी खजूर की तरह इस स्कूल को भी कलरफुल बना दिया गया है। वारित्रा फाउंडेशन की डॉयरेक्टर ऐशना कल्याण का कहना है वारित्रा का अर्थ छाता है इसलिए वारित्रा फाउंडेशन एक विचारधारा की सभी संस्थाओं को एक मंच पर लाकर एकजुटता से समाजहित में कार्य करने के लिए अपने कदम आगे बढ़ा रही हैं। हमने सबसे पहले शिक्षा के क्षेत्र को इसलिए चुना है क्योंकि शिक्षा इंसान का मौलिक अधिकार भी है और यही वो क्षेत्र है जहां सबसे अधिक काम करने का अवसर है। जाने माने शिक्षाविद व दयालसिंह कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल डा. रामजीलाल का कहना है कि वारित्रा फाउंडेशन जैसी संस्थाएं समय की जरूरत हैं, आज जिस तरह से प्राइवेट स्कूल मां बाप की गाढ़ी कमाई को लूट रहे हैं उसमे वारित्रा फाडंडेशन जैसी पावन सोच की संस्थाएं जो सरकारी स्कूलों के उद्धार का काम कर रही हैं ठंडी फुहार की तरह हैं। ऐसी संस्थाओं को ग्रामीणों, पंचों, सरपंचों, महिलाओं को सुपोर्ट करना चाहिए क्योंकि ऐसा करके वे खुद के बच्चों के भविष्य का निर्माण में सहायक सिद्ध होंगे।

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वारित्रा फाउंडेशन का विजन :
डिवलेप, डॉयलॉग एंड ड्रीम-बच्चे अपने सोशल इश्यू को पहचानें, प्राब्लम का समाधान ढूंढे और उस ड्रीम को कैसे पूरा किया जा सकता है इसके लिए खुद क्षमतावान हों। बच्चे ऐसा सीखें जो उनके जीवन में काम आए, वो सिर्फ किताबी ना हो, शिक्षा का अर्थ भी यही है। वारित्रा फाउंडेशन की ओर से गढ़ी खजूर व सदरपुर में कलरफुल स्कूल शुरू हो गया है लेकिन लर्निंग प्रोसेस फैज अलीपुर, प्रेमनगर,ततारपुर, हसनपुर में भी चल रहा है। यहां स्कूल के बाद 4 से 6.30 बजे तक क्लासिस चल रही हैं, इन क्लासिस को पोस्ट स्कूल मेडिकल क्लासिस कहा जाता है। खास बात यह है कि इन लर्निंग स्कूलों में आसपास के स्कूली बच्चे भी पढऩे आने लगे हैं। वारित्रा फाउंडेशन के डायरेक्टर ऐशना व बलजीत के अनुसार, जल्द ही सभी स्कूल कलरफुल होंगे। इस कड़ी में पहले फेज में 15 गांवों को चिन्हित किया गया है।

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